
भारत के पड़ोसी देश Nepal में आज सत्ता का नया अध्याय लिखे जाने की तैयारी है। हाल ही में हुए आम चुनावों की मतगणना शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझान बता रहे हैं कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है।
सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है Balen Shah। शुरुआती रुझानों में उनकी पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसने पारंपरिक दलों की नींद उड़ा दी है।
शुरुआती रुझान: बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे
चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार कई सीटों पर मतगणना के शुरुआती रुझान सामने आ चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बालेन शाह की पार्टी करीब 45 सीटों पर बढ़त में, CPN-UML लगभग 5 सीटों पर आगे, Nepali Congress 4 सीटों पर बढ़त, Pushpa Kamal Dahal की पार्टी 3 सीटों पर आगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो नेपाल की संसद में नई ताकत उभर सकती है।
नेपाल की संसद का गणित
नेपाल की संसद कुल 275 सीटों की है। इसमें चुनाव दो अलग-अलग सिस्टम से होते हैं। 165 सीटें – फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (सीधे चुनाव), 110 सीटें – आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली। मतगणना जारी है और चुनाव आयोग ने दावा किया है कि 24 घंटे के भीतर नतीजे साफ हो सकते हैं।
मतदाताओं और उम्मीदवारों का आंकड़ा
इस बार के चुनाव में लोकतांत्रिक भागीदारी भी चर्चा में रही। कुल रजिस्टर्ड मतदाता: 1 करोड़ 89 लाख से अधिक। मतदान प्रतिशत लगभग 60%, उम्मीदवारों की उम्र का भी दिलचस्प डेटा सामने आया है। 1,925 उम्मीदवार – 41 से 60 वर्ष। 425 वरिष्ठ नागरिक उम्मीदवार। 201 युवा उम्मीदवार 30 साल या उससे कम। यह आंकड़े दिखाते हैं कि नेपाल की राजनीति में युवा नेतृत्व की मांग तेजी से बढ़ रही है।

Gen-Z आंदोलन के बाद बदली राजनीति
करीब छह महीने पहले हुए Gen-Z आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को झकझोर दिया था। सड़कों पर उतरे युवाओं ने पारंपरिक दलों के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया था। अब चुनाव के शुरुआती रुझान संकेत दे रहे हैं कि वही गुस्सा शायद वोट में बदल गया है। यही वजह है कि विश्लेषक इसे नेपाल की राजनीति में “सिस्टम शेक-अप” कह रहे हैं।
ओली क्यों पिछड़ते दिख रहे?
एक और बड़ा अपडेट यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli शुरुआती रुझानों में पीछे चल रहे हैं। एक सीट पर वे करीब 1000 से ज्यादा वोटों से पीछे बताए जा रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो नेपाल की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये चुनाव?
नेपाल की राजनीति सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं रहती। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, व्यापार और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। इसलिए नई सरकार की नीतियों का असर सीधे दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति पर पड़ सकता है। और फिलहाल सवाल यही है क्या नेपाल की जनता पारंपरिक राजनीति को बदलने जा रही है?
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